माँ कामाख्या तंत्र साधना केंद्र

मुख्यतः हमारे संस्था में तंत्र, मंत्र और यंत्र के बारे में शोध के साथ ही साथ साधक को साधना के माध्यम से सिद्धी की और यानी की देवी देवता की ओर ले जाते है, इसके कई मध्यम है जिसमे सबसे पहले है भक्ति मार्ग, साधना मार्ग, योग, ध्यान और तंत्र मार्ग(specially वाम मार्ग की साधनाएं) साथ ही साथ दक्षिण मार्ग यानी सात्विक तरीके भी साधनाएं करवाई जाती है मां कामाख्या तंत्र साधना केंद्र में मुख्यतः वाम मार्ग की देवी माता कामाख्या देवी और दस महाविद्या माता काली, मां तारा, मां भैरवी, माता धूमावती, माता छिन्नमस्ता, माता बगलामुखी, माता भुवनेश्वरी, माता मातंगी, माता त्रिपुर सुंदरी और माता कमला देवी की पूजा, हवन और इनकी साधनाएं सिद्धि के लिए मार्ग दर्शन किया जाता है….हमारे संस्था के द्वारा देश के विभिन्न शक्तिपीठ और धर्म स्थलों पे पिछले कई वर्षो से साधनाएं शिविर आयोजित किया गया है जिसमे देश के अलग अलग क्षेत्र के साधक के साथ ही साथ देश विदेश के भी साधक भाग लेते है और हमारे संस्था के संस्थापक श्री 108 तांत्रिक गुरु शशि भैरव जी के मार्गदर्शन में  ऑनलाइन/ऑफलाइन साधनाएं सिद्धि कर रहे है, 

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गुरुदेव श्री शशि भैरव जी महाराज अपने परमपूज्य गुरुदेव के आदेश और आशीर्वाद से समाज कल्याण हेतु इस नेक काम में समर्पित है जिससे की साधक इस लुप्त होते विद्या को सिख कर सत्य सनातन परंपरा को पुनः इस दिव्य और गुप्त विद्या का सौगात दे सके...हमारे संस्था के द्वारा देश के विभिन्न शक्तिपीठ और धर्म स्थलों पे पिछले कई वर्षो से साधनाएं शिविर आयोजित किया गया है जिसमे देश के अलग अलग क्षेत्र के साधक के साथ ही साथ देश विदेश के भी साधक भाग लेते है और हमारे संस्था के संस्थापक श्री श्री 108 तांत्रिक गुरु शशि भैरव जी के मार्गदर्शन में ऑनलाइन/ऑफलाइन साधनाएं सिद्धि कर रहे है, गुरुदेव श्री शशि भैरव जी महाराज अपने परमपूज्य गुरुदेव के आदेश और आशीर्वाद से समाज कल्याण हेतु इस नेक काम में समर्पित है जिससे की साधक इस लुप्त होते विद्या को सिख कर सत्य सनातन परंपरा को पुनः इस दिव्य और गुप्त विद्या का सौगात दे सके... इस विद्या को प्राप्त कर कोई भी साधक अपने आस पास के अदृश्य शक्ति चाहे वो सकारात्मक यानी देवी देवता की शक्ति या नकारात्मक यानी इतर योनि की शक्ति से संपर्क साध बहुत से संभव कृत्य को संपादित कर के समाज कल्याण कर सकते है जैसा की आप सभी अपने बड़े बुजुर्ग से सुनते आए है... जैसा की हमारे संस्था के नाम से ही स्पष्ट है की हमारा ये संस्था मां कामाख्या शक्ति पीठ स्थित देवी मां के गुप्त विद्या से जुड़ी हुई है, इसी गुप्त विद्या को लोग कामरूप की विद्या, मयोंग की विद्या, बंगाली तंत्र या फिर ग्रामीण विद्या के नाम से जानते है, वस्तुतः ये विद्या अति प्राचीन है जिसका निर्माण देवाधिदेव महादेव बाबा भोलेनाथ शिव शम्भू ने माता पार्वती को दिए और अपने शिष्य दत्तात्रय जी, शुक्राचार्य, रावण को दिए जिनके माध्यम से ये विद्या गुरु शिष्य परंपरा के माध्यम से आम जन मानुष तक पहुंचा... इसी कर्म में इस विद्या को और सरल बनाते हुए बिहार, आज के यूपी और नेपाल के तराई वाले भागो में गुरु मक्षेंद्रनाथ जी और नौ नाथ और 84 सिद्धों के द्वारा क्षेत्रीय भाषा में निर्मित साबर विद्या के रूप में इसको और विस्तार मिला जिसे आज तक हम सभी उपयोग कर रहे है... तंत्र विद्या और इसके साधना सिद्धि के बारे में रामायण, महाभारत और गुरु शुक्राचार्य, गुरु विश्वामित्र जी के द्वारा वर्णन मिलता है... इसी विद्या को हमारे सदगुरु तांत्रिक शिरोमणि श्री श्री 108 शशि भैरव जी महाराज आप सभी साधकों के संजोग से विस्तार देने में लगे है, आप सभी तंत्र, मंत्र, साधना सिद्धि प्रेमी आइए और गुरुदेव के इस शुभ कार्य में अपना योगदान दे के अपने इस जीवन को अमर कर जाएं... मां कामाख्या तंत्र साधना केंद्र में तांत्रिक साधना में पंच मकार साधना से लेकर षट्कर्म को भी सिखाया जाता है... ऐसे तो हमारे गुरुदेव इस कार्य में कई वर्षो से योगदान दे रहे है लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफार्म पे गुरुदेव 2020 से अपने गुरुकार्य को संपादित कर रहे है, हमारा ये संस्था भारत सरकार द्वारा निबंधित है, जहां आप सभी को तंत्र, मंत्र के साथ ही साथ आध्यात्मिक पूजा पाठ साधना सिखाया जाता है..

पंच मकार साधना

इसमें 'म' से शुरू होने वाली पांच चीज़ों का इस्तेमाल किया जाता है: मद्य (मदिरा), मांस, मत्स्य (मछली), मुद्रा (भूना हुआ अनाज), मैथुन (सम्भोग)

ग्रामीण तंत्र

ग्रामीण तंत्र में आने वाली षट्कर्म से लेकर कौतुक वाली साधनाएं जो केवल गुरु वाणी से चलती है

बंगाली विद्या

भारत की विख्यात असली बंगाली विद्या और गुप्त माँ कामाख्या सिद्धी साधनाएं

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षट्कर्म प्रयोग

मारण, मोहन, आकर्षण, वशीकरण, विद्वेषन और उच्चाटन के सिद्धहस्त

वाम मार्गी साधना

अति शीघ्र सिद्ध होने वाली, शीघ्र फल देने वाली वाम मार्ग की गुप्त साधना और प्रयोग

दक्षिण मार्गी साधना

वैदिक, दैवी पद्धति से मनचाही सिद्धी प्राप्त करने की अचूक सात्विक साधनाएं

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about us

गुरुदेव और उनके कार्य के विषय में संक्षिप्त

हमारे गुरुदेव तांत्रिक शिरोमणि श्री श्री १०८ शशि भैरव जी का जन्म १ जून १९८४ में पूर्णिया में हुआ थ। उन्हें बचपन से ही अध्यात्म में काफी रूचि रही है

18

वर्षों

का अनुभव

आने वाला शिविर

ये पर्ची बनाने की सिद्ध और अद्भुत साधना है जिससे माध्यम से आप किसी व्यक्ति विशेष का भूत, वर्तमान और भविष्य जान सकते है |

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ये दोनो तरह की विद्या अपने आप में अद्वतीय है, जो सिर्फ और सिर्फ गुरु शिष्य परंपरा से चलती है, बस एक बार गुरुमुखी ये विद्या आपको मिल गया तो आप सफल साधक बन गए

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